Saturday, 9 May 2020

सिद्धांतनिष्ठा ही व्यक्ति को महान बनाती है ..

कार्ल मार्क्स लन्दन में निर्वासित जीवन जी रहे थे और  उन्हें फ़्रांस और जर्मनी की सरकारों ने क्रन्तिकारी घोषित कर दिया था । प्रवास के दौरान  लन्दन में कार्ल मार्क्स को घोर आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था । यहाँ तक कि गरीबी के कारण उनके दो बच्चों की मृत्यु भी हो गई थी ।

जर्मनी में उन दिनों प्रधानमंत्री बिस्मार्क थे । उन दिनों जर्मनी पूँजीवादी देशों में सबसे आगे था । बिस्मार्क ने कार्ल मार्क्स को धन की लालच देकर खरीदना चाहा जिससे कार्ल मार्क्स के बढ़ते प्रभाव को कम किया जा सकें । उन्होंने कार्ल मार्क्स को इस आशय का प्रस्ताव प्रेषित किया परन्तु कार्ल मार्क्स अपने निश्चय पर अटल रहे और जनकल्याण के प्रति निष्ठावान रहे और टस से मस भी नहीं हुये ।

बिस्मार्क ने उन्हें धन की लालच देकर खरीदना भी चाहा और उसकी योजना निष्फल हो गई । कार्ल मार्क्स को सिद्धांतनिष्ठा ने उन्हें महान बना दिया । कहने का आशय यह है कि व्यक्ति के सिद्धांत और निष्ठा ही उसे महान बना देती है ।          

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